JOIN MY BLOG

अगर आपको हमारा पेज पसंद आये तो हमारे साथ जुडे .

come in my blog

अगर आपको हमारा पेज पसंद आये तो हमारे साथ जुडे .

come in my blog

अगर आपको हमारा पेज पसंद आये तो हमारे साथ जुडे .

Welcome

अगर आपको हमारा पेज पसंद आये तो हमारे साथ जुडे .

अगर आपको हमारा पेज पसंद आये तो हमारे साथ जुडे

आप लोगो का हमारे पेज मे बहुत बहुत स्वागत है.

Sunday, 5 March 2017

मेरी पहली घटना

एक बार की बात है। मैं अपने मामा के घर जा रहा था। उस दिन काफी तेज बारिश हो रही थी। मैं बस में बैठ गया। तभी एक सज्जन आए और मेरी बगल वाली सीट पर बैठ गए। बस चलने पर उन्होंने मुझसे बातचीत शुरू कर दी। पहले बात मौसम से शुरू हुई, फिर उन्होंने मुझसे सारी जानकारी ले ली। मैं भी बातों में मस्त होकर उन्हें सारी बात बताता रहा। कुछ देर के बाद बस रास्ते में चाय-नाश्ते के लिए रुकी। हम दोनों नीचे उतरे, तब उन्होंने मुझसे चाय की पेशकश की। मैंने भी रजामंदी दे दी। चाय पीकर हम दोनों बस में आकर बैठ गए। अब हम दोनों में गहरी मित्रता हो गई थी। बस में आकर उन्होंने अपने बैग से मिठाई निकाली और बोले, ‘लो बेटे, मिठाई खाओ, आज मेरे बेटे का जन्मदिन है। उसी के लिए ले जा रहा हूं।’ मैंने थोड़ी ना-नुकुर की। लेकिन उनकी जिद के आगे हार गया। मैंने दो बर्फियां उठा लीं। मेरे साथ-साथ उन्होंने भी वहीं मिठाई खाई, इसलिए मुझे उन पर भरोसा हो गया था। फिर बातों ही बातों में कब मेरी आंख लग गई, मुझे पता भी न चला। करीब एक घंटे के बाद जब मेरी आंख खुली, तो बस मेरी मंजिल तक पहुंचने वाली थी। मैंने राहत की सांस ली और अपना सामान निकालने के लिए जैसे ही उठा, तो मेरा बैग गायब था। मैंने पूरी बस छान मारी। बगल वाले सज्जन भी गायब थे। लोगों से पूछने पर पता चला कि वह तो कब के उतर गए हैं। थोड़ी देर में मुझे समझ आ गया कि जरूर वह नशाखुरानी गिरोह का सदस्य था, जो मुझे बेहोशी की दवा खिलाकर बैग लेकर चंपत हो गया। मुझे बड़ों की सलाह की याद आने लगी। सफर मे किसी का भरोसा ना करने कि पहले ये सब मजाक लगता था जब मेरे साथ हुआ तब एह्सास हुआ

जब तक चोट खुद को ना लगे दर्द समझ नही आता .......

Friday, 3 March 2017

सोच

  • लोग अक्सर यही सोचते है वो हमारे बारे मे अच्छा नही सोचते तो हम क्यो उनके बारे मे सोचे लेकिन 
  • आप ये भूल जाते है. कि मधुमक्खिया सहद ये सोच कर नही बनाती कि ये सहद कोई और उपयोग करे.
  • वो तो सहद को अपने भोजन के लिये तैयार करती है लेकिन वो सहद दवा के रुप मे भोजन के रुप हम इंसान उपयोग करते है॥ 
  • यानि अंजाने मे मधुमक्खिया बहुत से लोगो का भला कर देती है।
  • इसलिये जब भी आपको मौका मिले आप लोग मदद करे उनकी जिनको आपकी मदद की जरुरत हो 
  • क्या पता आपकी मदद उनकि जिंदगी सवार दे। 
  • आने वाले होली के त्योहार मे आप लोग जितने भी लोगो कि मदद कर सके जरुर करे॥


मेरी क्या हस्ती जो मै किसी को कुछ दु 
रब ने जो दिया है उसी का कुछ हिस्सा दुसरो मे  बाट दु...

इसी सोच के साथ आने वाले त्योहार को मनाये.....

Tuesday, 18 March 2014

योगी निकले भोगी



इस देश  क्या होगा यारो अब किसी योगी पर विस्वाश करने लायक नहीं रह गया ! पहले जनता सर पर बिठा  लेती है ! सर पर क्या बैठे खुद को भगवान् समछ बैठते  है ! और जनता को अपना गुलाम सम्छ्ते है ! बाबा राम देव की बात ले लो !अपने आप को गरीबो का हम दर्द बताने वाले राम को ही देख लो !कहते   है की मोह माया एक प्रकार का जंजाल है !अगर यह जंजाल है तो , तो खुद के जमी पर पैर नही रुकते पर्सनल प्लेन से सफ़र करते है क्यों
अगर यह हमदर्द होते तो अनसन क्यों तोड़ दिया ! अनसन की बात छोडो जितने दिन अन्सान में रहे उतने ही दिनों में लाखो की सम्पत्ति खर्च हो गई बाबा राम देव के ऊपर !
सायद यह कहावत किसी ने सही कही है "मुख में राम बगल में छुरी ,समय देख घुस  दे पूरी " क्या यही बाबा की निसानी  होती है , की वोह दुसरो से कहे लड़ते रहो ,और खुद जंग छेड़ दे और पीछे हट जाये ,यह तो मामा सकुनी की कहानी हुई की पांडव और कौरवो की जंग सुरु कर  दी  और दूर  बैठ   कर उसका  आनंद  लेने लगे   जैसे कोई टीवी का सिरिअल चल रहा हो "यहाँ पर जनता तो टीवी सिरिअल में कार्य करने वाले अभिनेता और बाबा जी तो आराम से बैठ कर देखने वाले दर्शक  हो " जो की अभिनेता की मुसीबात में देख जनता जैसे तालिय बजाती  है  कुछ इसी प्रकार बाबा जी का हाल है 
एक सवाल ---- क्या किसी धर्म पुराण में लिखा  है की बाबा जोगी को नहीं भोगी को कहते है ,क्या हम पूछ सकते है किसी से की बाबा जी को पैसो की जरुरत क्यों है और वोह हर देश में अपनी संस्था का प्रचार प्रसार कर रहे है क्यों " किसी किसी का जवाब होगा की बाबा जी सभी लोगो तक अपनी बात पहुचाना चाहते है 
अगर सच में बाबा जनता के हितैसी है तो योग सिविर में आम लोग क्यों नहीं जा पाते जिनके पास !पास बनवाने के लिए पैसे नहीं है अगर बाबा जनता के हितैसी है तो जनता के साथ क्यों नहीं अनशन में खड़े रहे "? बाबा जी का तो रोज  चेकअप होता था जितने दिन अनशन में रहे क्या किसी ने जनता की खबर ली ??? जनता के हितैसी बताने वाले बाबा जी हाई टेक जिंदगी क्यों जी रहे है यहाँ जनता के पास चलने के लिए साइकल तक नहीं है और बाबा जी तो प्लेन से चलते है 
किसी को मेरी बात से कोई तकलीफ पहुचे उसके लिए माफ़ी चाहता हु लेकिन क्या करू मैंने ऐसे - २ लोग देखे की बाबा रामदेव को इतना  चाहते है उतना वोह अपने माँ बाप को नहीं पूजते 
-----------------------------------------------------------------------------------
-------------------यह मै नहीं कह रहा जनता कह रही है-----------------
-----------------------------------------------------------------------------------
      सभी लोगो को होली कि बहुत  -   बहुत  बधाई 

Monday, 28 October 2013

Wednesday, 12 December 2012

..प्यार की दौलत

बात उस समय की जब राजा हुआ करते थे एक बार राजा ने भोज के लिए  ब्राह्मणों को आमंत्रित किया सभी ब्राह्मण राजा का प्रस्ताव स्वीकार कर भोज में आमंत्रित हुए उसमे से एकी ब्राह्मण ने राजा से पूछा यह भोज करने का कारन बताओ राजा ने कहा यह भोज मई अपने पुत्र के गुरुकुल से नगर आगमन पर कर रहा हु उस ब्राह्मण ने रजा से अपने पुत्र को  मिलाने का आग्रह किया रजा ने अपने पुत्र से ब्राह्मण के चरण स्पर्श करने को कहा पुत्र ने रजा की कहई बात के अनुसार सभी ब्राह्मणों के चरण स्पर्श कर अशिर्बाद लिया फिर अपने स्थान पर  जाकर बैठ गया भीर सभी ब्राहमण ने भोजन किया और भीर राजा को अशिर्बाद देकर जाने लगे तभी राजा ने सभी से रुकने का अगढ़ किया और एक खुस्बरी की बात कह कर सभी लोगो को वह रोक लिया  भीर ब्राह्मणों से सलाह देने को कहा की मई अपने पुत्र को राजा बनाना चाहता हु कैसा है मेरा यह फैसला सभी तो मान गए लेकिन एक ब्राह्मण ने कहा की पहले राज कुमार को परीछा देनी होगी रजा अछ्म्भित होकर कैसी परीछअ  ब्राह्मण ने कहा पहले राज कुमार यह सिद्ध करे की वोह राजा बन्ने के काबिल है ब्राह्मण ने कहा मेरे एक प्रश्न का उत्तर दे राज कुमार पहले राज कुमार बहुत ही आदर पूर्वक अपना प्रश्न पूछे ब्राह्मण ब्राह्मण ने कहा बताओ बताओ सबसे ज्यादा गरीब कौन राज कुमार पहले कुछ देर सोचते रहे फिर बहुत ही नम्रता से उत्तर दिया हे ! ब्राह्मण यहाँ तो सबसे ज्यादा तो बिन माँ का बेटा सबसे ज्यादा गरीब होता है क्योकि इस जहा में सबसे बड़ी दौलत तो माँ का प्यार होता है और उसी प्यार से महरूम हो जाते है बिन माँ के बच्चे  माँ सबसे महान उसका जैसा कोई नहीं इस जहा में महान ...................................................

Thursday, 27 September 2012

काफी समय बाद

काफी समय से अपने ब्लॉग से दूर रहा हु अब अपने ब्लॉग पर कुछ रोचक कहानियो के साथ उपस्थित होने जा रहा हु मुछे उम्मीद है आप लोगो का प्यार पहले जैसे ही मुछे मिलेगा मै अभी तक कुछ निजी परेशानियो के कारन अपने ब्लॉग में कोई भी पोस्ट नहीं दे पाया हु इसलिए आप लोमै गो से यह उम्मीद रखता हु की आप लोग मुछे पहले जैसे प्यार देगे 

                                   चतुर व्यापारी

 

यह कहानी एक ऐसे व्यापारी की है जो एक बार वह अपने बिजनेस के सिलसिले से अपने देश से बहार अर्थात विदेश जा रहे थे तो उन्हें प्लेन में एक चोर से मुलाकात हो गई वह चोर भी  उसी प्लेन से विदेश जा रहा था वह चोर व्यापारी के बगल में आकर बैठ गया उस चोर की नजर व्यापारी की जेब  में रखे हीरे में थी वह चोर व्यापारी के सोने का इन्तजार करने लगा जब व्यापारी सो गया तो उसने व्यापारी के जेब से वोह हीरे निकाल लिए जब व्यापारी की नींद खुली तो उसने अपनी जेब में नजर दौड़ाई तो उसकी जेब में हीरे नहीं थे वह  माजरा समछ गया अब वोह हीरे उस चोर से कैसे वापस लिए जाये उसने मन में ही बड़ बडबराने  लगा और कहने लगा की हे भगवान् जो मेरी जेब में पत्थर रखे है उन्हें किस दुष्ट व्यक्ति को दिया जाये जाये जिससे उस व्यक्ति का सारा परिवार तितर वितर हो जाये यह बात बगल में बैठा चोर सुन रहा था उस चोर ने उस व्यापारी से उन पत्थरो के बारे में पूछा व्यापारी ने बड़े ही सहज भाव से उसको जवाब दिया उस व्यापारी ने कहा मेरी जेब में हीरे की तरह दिखने वाले पत्थर है यह पत्थर बड़े ही मन्हूश है यह पत्थर जिस भी व्यक्ति को दे दिए जाये उस व्यक्ति का सारे  परिवार पर बिप्पत्ति आ जाती है वह चोर यह सुन कर घबरा गया अब उसने सोचा की यह पत्थर कैसे उस व्यापारी को वापस दिया जाये उसने फिर से उस व्यापारी के सोने का इन्तजार करने लगा वोह व्यापारी फिर से सोने का बहाना कर के अपनी आंखे बंद कर ली उस चोर ने समझा वयारी सो गया है तो उसने वोह हीरे व्यापारी की जेब में रख दिए इस तरह व्यापारी ने अपनी सुछ बुछ से अपने हीरे वापस प्राप्त कर लिए 
अपनी राय हमें जरुर दे  .......................