Tuesday, 15 August 2017

क्या हम आजाद है १५ अगस्त मेरी कलम से

 क्या होती है आजादी ये १५ अगस्त क्या होता है ये क्यों मनाया जाता है शायद ही आज की नस्लों को इसकी सही जानकारी हो। 
गुलामी ख़त्म कहा हुई उसका स्वरुप बदला है 
पहले अंग्रेजो के गुलाम थे आज नेताओ के राजनीती के 
पहले सर कटा लिया देश बचाने के लिए 
अब सर काट दिए जाते है वोट बढ़ाने के लिए 
अजीब हालत है देश की। 
 71 बरस हो गए आजाद हुए 
हमें आजाद होने में 250  बरस लग गए थे अंग्रेजो से 
हमारी अपनी सेना जो की भारत के ग्रामीण इलाको के गरीब लोगो के हाथो  और वही गरीब लोगो के परिवार 
जो की किसान मजदुर है उनकी सुध   लेने  कोई नहीं 
हम उस दिन आजाद होंगे जिस दिन कोई गरीब भूखा न सोये 
जिस दिन आर्थिक तंगी की वजह से   कोई गरीब  मौत को गले ना लगाए  

जिस दिन विकास हमारा नारा नहीं बल्कि  पहली प्राथमिकता होगी उस दिन हमारे कदम आजादी की ओर  बढ़ चलेंगे 


जय हिन्द बन्दे मातरम 

Saturday, 29 July 2017

मेहनत का फल मीठा होता है

 अक्सर आप सभी लोगो ने सुना होगा मेहनत का फल मीठा होता है

 बात उस समय की है जब अपना देश गुलामी की जंजीर में जकड़ा हुआ था उस समय एक साधारण से घर में जन्म  लेने वाला बालक जिसका नाम संजीव था उसने एक दिन एक अंग्रेज को घोडा  गाडी में आते हुए देखा उस घोडा गाड़ी के पीछे बहुत सारे सैनिक को आते हुए उसने देखा तो उसके मन में एक ख्याल आया  की मै भी एक दिन ऐसा ही बड़ा आदमी बनुगा उसने  ये बात सारी रात सोची की मै बड़ा आदमी कैसे बनु उसने एक योजना बनाई वह सुबह जल्दी उठ जाता और अंग्रेजो को नीम का दातुन बेचता फिर उस दातुन से जो कमाता उससे वह अख़बार खरीदता और फिर अखबार बेचता और फिर अखबार से जो कमाता उससे तो वो दूध खरीदता और उस दूध से चाय बनाता और उसे बेचता ऐसा करते करते कुछ ही वर्षो में उसने काफी धन इकट्ठा कर लिया और वह साधारण सा बालक अब  एक सेठ बन चूका था इस कहानी का सिर्फ एक आशय है वो ये की जीवन में आप अपने धन को फिजूल में खर्च न करके निवेश में लगाए  फिर आपको सफल होने से कोई नहीं रोक सकता |



  Don't waste for money                           only invest for money 


Friday, 28 July 2017

स्वागतम दोस्तों

सभी मित्रो को रक्षा बंधन की अग्रिम बधाइयाँ
                                                                                जमावड़ा----की ओर से 

Sunday, 26 March 2017

प्यार की बात

शब्द के बाण वो चलाते गये ।
उनकी इस अदा पर हम मुस्कुराते रहे ॥
कैसे हम उनकी तौहिन कर देते ।
जब बिना बताये हम उन पर बेपनाह प्यार लुटाते रहे ॥


Sunday, 5 March 2017

मेरी पहली घटना

एक बार की बात है। मैं अपने मामा के घर जा रहा था। उस दिन काफी तेज बारिश हो रही थी। मैं बस में बैठ गया। तभी एक सज्जन आए और मेरी बगल वाली सीट पर बैठ गए। बस चलने पर उन्होंने मुझसे बातचीत शुरू कर दी। पहले बात मौसम से शुरू हुई, फिर उन्होंने मुझसे सारी जानकारी ले ली। मैं भी बातों में मस्त होकर उन्हें सारी बात बताता रहा। कुछ देर के बाद बस रास्ते में चाय-नाश्ते के लिए रुकी। हम दोनों नीचे उतरे, तब उन्होंने मुझसे चाय की पेशकश की। मैंने भी रजामंदी दे दी। चाय पीकर हम दोनों बस में आकर बैठ गए। अब हम दोनों में गहरी मित्रता हो गई थी। बस में आकर उन्होंने अपने बैग से मिठाई निकाली और बोले, ‘लो बेटे, मिठाई खाओ, आज मेरे बेटे का जन्मदिन है। उसी के लिए ले जा रहा हूं।’ मैंने थोड़ी ना-नुकुर की। लेकिन उनकी जिद के आगे हार गया। मैंने दो बर्फियां उठा लीं। मेरे साथ-साथ उन्होंने भी वहीं मिठाई खाई, इसलिए मुझे उन पर भरोसा हो गया था। फिर बातों ही बातों में कब मेरी आंख लग गई, मुझे पता भी न चला। करीब एक घंटे के बाद जब मेरी आंख खुली, तो बस मेरी मंजिल तक पहुंचने वाली थी। मैंने राहत की सांस ली और अपना सामान निकालने के लिए जैसे ही उठा, तो मेरा बैग गायब था। मैंने पूरी बस छान मारी। बगल वाले सज्जन भी गायब थे। लोगों से पूछने पर पता चला कि वह तो कब के उतर गए हैं। थोड़ी देर में मुझे समझ आ गया कि जरूर वह नशाखुरानी गिरोह का सदस्य था, जो मुझे बेहोशी की दवा खिलाकर बैग लेकर चंपत हो गया। मुझे बड़ों की सलाह की याद आने लगी। सफर मे किसी का भरोसा ना करने कि पहले ये सब मजाक लगता था जब मेरे साथ हुआ तब एह्सास हुआ

जब तक चोट खुद को ना लगे दर्द समझ नही आता .......

Friday, 3 March 2017

सोच

  • लोग अक्सर यही सोचते है वो हमारे बारे मे अच्छा नही सोचते तो हम क्यो उनके बारे मे सोचे लेकिन 
  • आप ये भूल जाते है. कि मधुमक्खिया सहद ये सोच कर नही बनाती कि ये सहद कोई और उपयोग करे.
  • वो तो सहद को अपने भोजन के लिये तैयार करती है लेकिन वो सहद दवा के रुप मे भोजन के रुप हम इंसान उपयोग करते है॥ 
  • यानि अंजाने मे मधुमक्खिया बहुत से लोगो का भला कर देती है।
  • इसलिये जब भी आपको मौका मिले आप लोग मदद करे उनकी जिनको आपकी मदद की जरुरत हो 
  • क्या पता आपकी मदद उनकि जिंदगी सवार दे। 
  • आने वाले होली के त्योहार मे आप लोग जितने भी लोगो कि मदद कर सके जरुर करे॥


मेरी क्या हस्ती जो मै किसी को कुछ दु 
रब ने जो दिया है उसी का कुछ हिस्सा दुसरो मे  बाट दु...

इसी सोच के साथ आने वाले त्योहार को मनाये.....

Tuesday, 18 March 2014

योगी निकले भोगी



इस देश  क्या होगा यारो अब किसी योगी पर विस्वाश करने लायक नहीं रह गया ! पहले जनता सर पर बिठा  लेती है ! सर पर क्या बैठे खुद को भगवान् समछ बैठते  है ! और जनता को अपना गुलाम सम्छ्ते है ! बाबा राम देव की बात ले लो !अपने आप को गरीबो का हम दर्द बताने वाले राम को ही देख लो !कहते   है की मोह माया एक प्रकार का जंजाल है !अगर यह जंजाल है तो , तो खुद के जमी पर पैर नही रुकते पर्सनल प्लेन से सफ़र करते है क्यों
अगर यह हमदर्द होते तो अनसन क्यों तोड़ दिया ! अनसन की बात छोडो जितने दिन अन्सान में रहे उतने ही दिनों में लाखो की सम्पत्ति खर्च हो गई बाबा राम देव के ऊपर !
सायद यह कहावत किसी ने सही कही है "मुख में राम बगल में छुरी ,समय देख घुस  दे पूरी " क्या यही बाबा की निसानी  होती है , की वोह दुसरो से कहे लड़ते रहो ,और खुद जंग छेड़ दे और पीछे हट जाये ,यह तो मामा सकुनी की कहानी हुई की पांडव और कौरवो की जंग सुरु कर  दी  और दूर  बैठ   कर उसका  आनंद  लेने लगे   जैसे कोई टीवी का सिरिअल चल रहा हो "यहाँ पर जनता तो टीवी सिरिअल में कार्य करने वाले अभिनेता और बाबा जी तो आराम से बैठ कर देखने वाले दर्शक  हो " जो की अभिनेता की मुसीबात में देख जनता जैसे तालिय बजाती  है  कुछ इसी प्रकार बाबा जी का हाल है 
एक सवाल ---- क्या किसी धर्म पुराण में लिखा  है की बाबा जोगी को नहीं भोगी को कहते है ,क्या हम पूछ सकते है किसी से की बाबा जी को पैसो की जरुरत क्यों है और वोह हर देश में अपनी संस्था का प्रचार प्रसार कर रहे है क्यों " किसी किसी का जवाब होगा की बाबा जी सभी लोगो तक अपनी बात पहुचाना चाहते है 
अगर सच में बाबा जनता के हितैसी है तो योग सिविर में आम लोग क्यों नहीं जा पाते जिनके पास !पास बनवाने के लिए पैसे नहीं है अगर बाबा जनता के हितैसी है तो जनता के साथ क्यों नहीं अनशन में खड़े रहे "? बाबा जी का तो रोज  चेकअप होता था जितने दिन अनशन में रहे क्या किसी ने जनता की खबर ली ??? जनता के हितैसी बताने वाले बाबा जी हाई टेक जिंदगी क्यों जी रहे है यहाँ जनता के पास चलने के लिए साइकल तक नहीं है और बाबा जी तो प्लेन से चलते है 
किसी को मेरी बात से कोई तकलीफ पहुचे उसके लिए माफ़ी चाहता हु लेकिन क्या करू मैंने ऐसे - २ लोग देखे की बाबा रामदेव को इतना  चाहते है उतना वोह अपने माँ बाप को नहीं पूजते 
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-------------------यह मै नहीं कह रहा जनता कह रही है-----------------
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