Wednesday, 6 July 2011

मोतिओ का हार

एक बार कि बात है कृष्ण देव अपने दरबार मे बैठे थे और प्रजा का दुख सुख सुन रहे थे । तभी उनके दरबार मे दो भाई आए । उनमे से छोटा भाई कह रहा था । कि पिता जी के पास एक कीमती हार था परन्तु बडा भाई कह रहा था कि वह नकली था और मेरे से कही खो गया है । इतने मे छोटा भाई बोला कि हार खो जाने का गम नही मुझे और मै कौन उसमे से हिस्सा माँग रहा हुँ ॥ परन्तु मेरे बडे भाई मेरे स्वर्गवासी पिता की प्रतिष्ठा पर जो तोहमत लगा । वह मुझसे बर्दास्त नही होता ।जो पिता अपने नौकरो को सोने के जेवर दान मे दिया करते थे । वह भला क्यो अपने लिए नकली मोतियो का हार क्यो बनवायेगे ।राजा कह रहा था हार सामने होता तो शायद कुछ फैसला हो पाता ।परन्तु बडे भाई के अनुसार हार उससे कही खो गया ।अब झुठ और सच की तथा असली नकली की पहचान कैसे हो सकती थी । राजा कृष्ण देव राय भी बडी उलझन मे फंस गये थे । सोच रहे थे कि क्या फैसला किया जाए । सहायता कि नजर से उन्होने महाचतुर, तेलानीराम की तरफ नजर दौडाई । तेनालीराम ने महाराज का इशारा पाकर उन दोनो से बोले कि सेठ जी जिन डिब्बो मे अपना किमती सामान रखते थे उन डिब्बो को कल तुम यहाँ ले आओ । अगले दिन खाली डिब्बो सहित दोनो भाई दरबार मे उपस्थित हुए तेलानीराम ने डिब्बो को उलट पलट कर देखा फिर उनकी नजर सोने कि सन्दुकची पर टिक गई , तेलानीराम बोले इतनी किमती सन्दुकची तुम्हारे पिता जी क्या करते थे ? छोटा भाई बोला इसमे वह अपनी सबसे प्रिय वस्तु रखते थे ।तेनालीराम ने पुछा क्या सबसे प्रिय बस्तु क्या मोतिओ का हार था ।तेनालीराम ने महराज से कहा भला आप यह सोचिए जो बस्तु जो बस्तु इतनी कीमती सन्दुकची मे रक्खी जाती थी वह भला नकली कैसे हो सकती है ।तभी बडे भाई ने महराज से झमा मागी । और आधा हिस्सा छोटे भाई को देने का वादा करके वापस चले गये ।तेनालीराम की सुझ बूझ और अक्लंमदी की सारे दरवारी वाह -2 करने लगे 
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 किसी ने सच ही कहा है सच्चाई का हो बोल बाला झुठे का हो मुह काला
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5 comments:

  1. बहुत खूब...बधाई

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  2. bilkul sahi kaha hai -sach ka bolbala jhoothhe ka muhn kala .aabhar

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  3. तेनालीराम की कहानी की बढ़िया प्रस्तुति पर हार्दिक बधाई.

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  4. बढ़िया कहानी की प्रस्तुति पर हार्दिक बधाई...

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