Wednesday, 29 June 2011

मिल गए गुरु

एक समय की बात है कबीर दास एक अच्छे गुरु की तलाश कर रहे थे ! वह सोच रहे थे की किसको अपना गुरु बनाये उन्होंने कई विद्वानों के नाम पर विचार किया लेकिन उन्हें किसी में अपने गुरु दिखाई  नहीं दिए एक दिन उन्हें रामानंद जी के बारे में पता चला तो कबीरदास उनके बारे में पता लगाते हुए कबीरदास रामानंद जी के पास पहुचे , बोले प्रभु आप मुछे अपना शिष्य बना लीजिये ! आप ही जो मेरे गुरु बन सकते है
रामानंद जी ने जवाब दिया मै तुमको छोड़ कर किसी को भी अपना शिष्य बना सकता हु लेकिन तुमको नहीं बना सकता !  कबीर वहा से चले आये कबीर के दिमाग में एक विचार आया  सुबह चार बजे जब रामानंद गंगा स्नान के लिए जब सीढियो से उतरने लगे अचानक रामानंद का पैर कबीर के सिने में पड़  गया और वह राम राम करते पीछे की तरफ हट गए मौका पाकर कबीर ने तुरंत रामानंद जी का पैर पकड़  लिया बस गुरु जी मुछे राम नाम का दान मिल गया ! प्रभु आज से आप ही मेरे गुरु है ! रामानंद तुरंत कबीर की चालाकी समछ गए और मुस्काने  लगे उन्होंने कबीर को उठाया और अपना शिष्य स्वीकार कर लिया आगे यही कबीर सारी दुनिया में अपने दोहों के लिए विख्यात हुए और उन्होंने अपने गुरु का मान बढाया  ?
                              कुछ दोहे यहा प्रस्तुत है
                                        "  दोहे "
"गुरु बिन ज्ञान, भेयाद बिन चोरी ,
होई ता कुछ न कुछ , थोरी माँ थोरी !!
"बड़ा हुआ तो क्या हुआ, जैसे पेड़ खजूर 
पछि को छाया नहीं ,फल लगे अति दूर !!
"माला फेरत जुग भया  , फिरा न मन का फेर 
कर का मन का डार दे, मन का मनका फेर !!
"दुःख में सुमिरन सब करे , सुख में करे न कोए 
जो सुख में सुमिरन करे ,ता दुःख कहे का होए !!
"कहत कबीर सुनो भाई साधू ,एक दिन ऐसा आयेगा 
हंस चुनेगा दाना मोती ,कौवा दूध पि जायेगा !!
नोट - हमारी गलतियो से अवगत कराये

6 comments:

  1. आभार इस कथा के लिए....

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  2. yah katha to bachpan se hi hame Guru ki mahtta samjha rahi hai .aapne fir se yad dilakar bahut achchha kiya hai .achchhi post .aabhar .

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  3. jeevan main agar guru achchha mil jaye to aap ek nek aur achchhe insaan ban sakte hain,

    sundar prastuti

    badhai

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  4. जीवन में सफलता के लिये एक सच्चे गुरु का मिलना बहुत बड़ी उपलब्धि है...

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