Thursday, 30 June 2011

सलाह बीरबल की


एक समय की बात है बीरबल दरबार नहीं गए हुई थे और वोह आज घर पर ही थे उसी दिन बादशाह अकबर ने नौकर को चुना लाने के लिए दरबार से भेजा !तभी बीरबल ने देखा की बादशाह का एक नौकर तेजी से कहीं दौड़ा जा रहा है। बीरबल ने पुकार लगाई, ‘‘अरे भाई ! कहां जा रहे हो तुम ? इतनी जल्दी में क्यों हो ?’’
नौकर ने उत्तर दिया, ‘‘बादशाह ने मुझे दो ढेरी चूना लाने को कहा है।
यह सुनकर बीरबल को कुछ संदेह हुआ। उसने पूछा, ‘‘बादशाह सलामत उस समय क्या कर रहे थे जब उन्होंने तुमसे कहा कि चूना लेकर आओ ?


‘‘दिन में बादशाह जब खाना खा चुके थे तो मैंने उन्हें पान पेश किया। उन्होंने पान मुंह में रखा ही था कि मुझे हुक्म दिया कि चूना लेकर आऊं।’’
बीरबल कुछ देर सोचता रहा, फिर बोला, ‘‘तुम बिल्कुल मूर्ख हो। तुमने पान में चूना ज्यादा लगा दिया होगा, जिससे बादशाह के मुंह का जायका बिगड़ गया होगा। अब तुम्हें सजा देने का यह तरीका चुना है उन्होंने। अभी जो चूना लेने तुम जा रहे हो, कुछ देर बाद वही चूना तुमसे खाने को कहा जाएगा। जब इतना अधिक चूना तुम्हारे पेट में पहुंचेगा तो तुम जिंदा कहां बचोगे।’’


सुनकर वह नौकर भय से थरथर कांपने लगा। बोला, ‘‘या खुदा ! अब मैं क्या करूं ?’’
बीरबल बोला, ‘‘देखो, होश मत खोओ। जैसा मैं कहता हूं, वैसा ही करो। सुनो, मक्खन के साथ चूने का असर लगभग खत्म हो जाता है। बराबर मात्रा में चूने के साथ मक्खन मिला लेना। यानी जितना चूना उतना मक्खन। इसे जब तुम खाओगे तो तुम पर चूने का जरा भी असर न होगा। ऐसा ही मक्खन मिला चूना लेकर तुम्हें बादशाह के पास जाना है। समझ गए न।’’
फिर उस नौकर ने वैसा ही किया जैसा बीरबल ने कहा था। बीरबल का यह सोचना भी बिल्कुल ठीक निकला कि बादशाह उसे चूना खाने का हुक्म देंगे। बादशाह ने उस नौकर से कहा कि यह सारा चूना उसे खाना है। और थोड़ी ही देर बाद सारा चूना उस नौकर के पेट में था। चूना खाकर वह अपने घर चला गया।
अगले दिन जब वह नौकर नियत समय अपने काम पर पहुंचा तो अकबर को लगा कि दुनिया के सात अजूबों में से एक उनके सामने खड़ा है। उस नौकर को देख वह हैरान तो थे ही, साथ ही उन्हें गुस्सा भी आ रहा था कि इतना चूना खाने के बाद भी यह जिंदा कैसे बच गया। तब पसोपेश में पड़े बादशाह ने एक चूना व्यापारी को बुलवा भेजा और उससे बोले, ‘‘कल मैं एक आदमी को तुम्हारे सुपुर्द करूंगा, तुम उसे चूने की भट्ठी में झोंक देना।’’
चूना व्यापारी ने हामी भरी और वहां से चला गया।


तब बादशाह उस नौकर से बोले, ‘‘देखो, तुम कल इस चूना व्यापारी के पास जाना और मेरे लिए पांच ढेरी चूना लेकर आना।’’
अगले दिन, बादशाह के लिए चूना लाने व्यापारी के पास जाने से पहले वह नौकर बीरबल के पास गया और सारी घटना से उसको अवगत कराया।
बीरबल ने उसकी बात ध्यान से सुनी, फिर बोला, ‘‘तुम अभी चूना लेने न जाओ।’’
दरअसल, जब बादशाह व चूना व्यापारी के बीच बातचीत हो रही थी तो बीरबल भी वहां मौजूद था। वह भलीभांति समझ गया कि बादशाह कि क्या मंशा है।


बीरबल ने यह भी देख लिया था कि एक अन्य नौकर ने भी यह सारी बातचीत सुन ली है।
वह नौकर पहले नौकर के प्रति शत्रुता का भाव रखता था। बीरबल जानता था कि यह कुटिल नौकर निश्चित समय पर सारा तमाशा देखने जरूर पहुंचेगा।
यही कारण था कि बीरबल ने पहले नौकर को तुरंत वहां जाने से रोक दिया था।


जैसी आशा थी वैसा ही हुआ। दूसरा कुटिल नौकर ठीक उस समय पर चूना व्यापारी के पास पहुंच गया। जब पहले नौकर को वहां आना था। उस नौकर को देख चूना व्यापारी ने समझा कि यही वह नौकर है, जिसे चूने की भट्ठी में फेंक देने का उसे हुक्म दिया है बादशाह ने। चूना व्यापारी ने उस कुटिल नौकर को गुद्दी से पकड़ा और घसीटकर ले जाते हुए चूने की भट्ठी में फेंक दिया।


थोड़ी ही देर बाद पहला नौकर वहां पहुंचकर बोला कि पांच ढेरी चूना चाहिए।
बादशाह का आदेश मान चूना व्यापारी ने उस नौकर को चूना दे दिया।
चूना लेकर वह नौकर दरबार में वापस आया। उसे सही-सलामत लौटा देख बादशाह की हैरानी सभी सीमाएं तोड़ गई, वे बोले, ‘‘क्या तुम रास्ते में किसी से मिले थे ?’’
‘‘नहीं हुजूर !’’ वह नौकर बोला, ‘‘लेकिन जब मैं जा रहा था तो बीरबल ने मुझे बुलाया था और मैं उसके घर भी गया था।’’
बादशाह को सारा  माजरा समछ्ते देर न लगी बादशाह समझ गए कि यह माजरा क्या है। उन्होंने नौकर


से चूना एक ओर रख देने को कहा और खुद   मुस्कराने लगे
नोट- हमारी गलतियो  से हमें अवगत कराये 

Wednesday, 29 June 2011

मिल गए गुरु

एक समय की बात है कबीर दास एक अच्छे गुरु की तलाश कर रहे थे ! वह सोच रहे थे की किसको अपना गुरु बनाये उन्होंने कई विद्वानों के नाम पर विचार किया लेकिन उन्हें किसी में अपने गुरु दिखाई  नहीं दिए एक दिन उन्हें रामानंद जी के बारे में पता चला तो कबीरदास उनके बारे में पता लगाते हुए कबीरदास रामानंद जी के पास पहुचे , बोले प्रभु आप मुछे अपना शिष्य बना लीजिये ! आप ही जो मेरे गुरु बन सकते है
रामानंद जी ने जवाब दिया मै तुमको छोड़ कर किसी को भी अपना शिष्य बना सकता हु लेकिन तुमको नहीं बना सकता !  कबीर वहा से चले आये कबीर के दिमाग में एक विचार आया  सुबह चार बजे जब रामानंद गंगा स्नान के लिए जब सीढियो से उतरने लगे अचानक रामानंद का पैर कबीर के सिने में पड़  गया और वह राम राम करते पीछे की तरफ हट गए मौका पाकर कबीर ने तुरंत रामानंद जी का पैर पकड़  लिया बस गुरु जी मुछे राम नाम का दान मिल गया ! प्रभु आज से आप ही मेरे गुरु है ! रामानंद तुरंत कबीर की चालाकी समछ गए और मुस्काने  लगे उन्होंने कबीर को उठाया और अपना शिष्य स्वीकार कर लिया आगे यही कबीर सारी दुनिया में अपने दोहों के लिए विख्यात हुए और उन्होंने अपने गुरु का मान बढाया  ?
                              कुछ दोहे यहा प्रस्तुत है
                                        "  दोहे "
"गुरु बिन ज्ञान, भेयाद बिन चोरी ,
होई ता कुछ न कुछ , थोरी माँ थोरी !!
"बड़ा हुआ तो क्या हुआ, जैसे पेड़ खजूर 
पछि को छाया नहीं ,फल लगे अति दूर !!
"माला फेरत जुग भया  , फिरा न मन का फेर 
कर का मन का डार दे, मन का मनका फेर !!
"दुःख में सुमिरन सब करे , सुख में करे न कोए 
जो सुख में सुमिरन करे ,ता दुःख कहे का होए !!
"कहत कबीर सुनो भाई साधू ,एक दिन ऐसा आयेगा 
हंस चुनेगा दाना मोती ,कौवा दूध पि जायेगा !!
नोट - हमारी गलतियो से अवगत कराये

Tuesday, 28 June 2011

बिन माँ की बच्ची पर भाभी की प्रताड़ना



यह कहनी एक ऐसी बच्ची की है जिसकी माँ उसके पैदा होते ही गुजर  जाती है उस लड़की की ७ भाबिया " यानि की भाइयो की बीबी " उनके साथ रहती है जब उनके भाई घर पर होते है तब तक तो उसको कोई तकलीफ नहीं देता जैसे ही भाई काम से चले जाते है सारा काम उसके सर डाल दिया जाता है और उसको मार - २ कर काम कराया जाता है लकिन उसे सबसे ज्यादा उसकी बड़ी भाभी उसे प्रताड़ित करती है हद तो तब हो जाती है जब उससे संभव न होने वाले काम उसे दिए जाते है एक बार उसकी बड़ी बभी ने उससे कहा अगर तू आज चलनी "जिसमे आटा को चला जाता है " उसमे उससे पानी लेन को कहा गया उससे कहा गया अगर वो चलनी में पानी नहीं लाई तो उसे न ही खाना दिया जायेगा बल्कि उसे घर से निकाल दिया जायेगा और उसके हाथ में चलनी देकर उसे कुए के पास भेज दिया गया उसकी बड़ी भाभी थी वोह बहाना ढूड रही थी उसे निकालने का अब वोह छोटी सी बच्ची रोते हुए कुए पास पहुची और वोह वहा बैठ कर रोने  लगी थोड़ी देर बाद उस कुए में रहने वाली मकड़ी को उस बच्ची का रोना देखा नहीं गया और उसने कुए से बहार आकर उससे पूछ ही लिया की क्यों रो रही हो उस बच्ची ने रोते हुए जवाब दिया मुछे भाभी ने इस चलनी में पानी लाने को कहा है उस मकड़ी ने चिंता मत करो तुम चलनी को निचे रख दो मै इसमें जाल लगा देती हु और तुम इसमें पानी भर कर ले जाना उस बच्ची ने ऐसा ही किया और पानी भर कर ले गई इससे बड़ी भाभी का यह प्लान चकना चूर हो गया उसे निकालने वाला उसने दूसरा प्लान बनाया और फी उस लड़की को जंगल भेज दिया और कहा अगर आज साम तक लकड़ी का गठ्ठर साम तक घर नहीं लाई तो तुमे घर से निकाल दुगी लेकिन उसे गठ्ठर बाधने  के लिए कुछ नहीं दिया और कहा गठ्ठर को बिना बाधे घर लेकर आना और उसे भूखा ही घर से भेज दिया बेचारी वोह लड़की दिन भर लकडिया इकठ्ठा करती रही जब लकडिया हो गई तब वोह बैठ कर रोने लगी की बिना बाधे लकडिया घर कैसे ले जाऊ यह सब माजरा साप देख रहा था उस साप ने लड़की के पास आकर पूछा क्यों रो रही हो लड़की ने भाभी की कही सारी बात बता दी साप ने चिंता मत करो उसने कहा मै इस गठ्ठर से लिपट जाता हु और तुम लकडियो को ले जाना और तुम इस गठ्ठर को जहा पर पनारा हो वाही रख देना मै पनारे में घुस जाउगा और तुम्हारी भाभी कुछ नहीं कहेगी उसने ऐसा ही किया और वोह लकडिया घर ले आई भाभी सोच में पद गई यह भी प्लान फेल हो गया अब उसने ऐसा प्लान बनाया की वोह इस बार वोह घर से निकल ही जाये उसने धान की बोरी देते हुए कहा "धान यानि बिना छिला चावल " उसको अपने हाथो से शाम तक छिल कर लाये  और यह भी कहा की अगर एक भी दाना टुटा या कम हुआ तो उसे धक्के मार कर घर से निकाल देगी और उसे धान की बोरी पकड़ा दी अब लड़की छत पर जाकर बैठ कर रोने लगी एक चिड़िया को उस पर दया आ गई उसने उस लड़की से पूछा क्यों रो रही हो उसने भाभी का सारा ब्र्तान्त उसे सुना दिया उस चिड़िया ने कहा चिंता मत करो वोह चिड़िया जाकर अपनी सभी सहेलिओ को लिवा लाई उन सभी ने मिलकर शाम से पहले ही सारा धान को छिल दिया लेकिन उनमे एक कानी चिड़िया थी जिसने एक दाना चुप चाप खा लिया अब उस लड़की को क्या पता उसने सारा चावल बोरी में भरा और भी को दे दिया भाभी ने बड़े गौर से देखा और कुछ देर बाद कहती है इसमें एक दाना कम है वोह दाना कहा है उस लड़की ने जवाब दिया मुछे नहीं मालूम उसकी भाभी ने उसे उसी वक्त घर से निकाल दिया फिर वोह लड़की रोते हुई जंगल की तरफ चली गई और जंगल में बैठ कर रोने लगी उधर से उनके भाई कम से घर लौट रहे थे उन्होंने जंगल में किसी को रोते सुना तो उनके सबसे बड़े भाई ने कहा सायद कोई रो रहा है उन्होंने घोड़े को उसी तरफ मोड़ दिया जिधर से आवाज आ रही थी पास जाकर देखा तो वोह उनकी छोटी बहन निकली उसने सारा ब्र्तान्त अपने भाइयो को सुनाया उन्होंने उसे अपने साथ ले लिया और घर पर जाकर अपनी छोटी बहन का नाम पुकारते हुए कहा पानी लेकर आओ लेकिन पानी लेकर सबसे छोटी उस लड़की की भाभी निकली उन्होंने उससे पानी नहीं लिया उन्होंने कहा पानी तो हम केवल बहन के हाथो से पियेगे लेकिन बहन घर पर हो तब न धीरे - २ करके उसकी सभी भाभिया पानी लाई लेकिन पानी उन्होंने किसी के हाथ का नहीं पिया अब सबसे बड़ी वाली भाभी आई पानी लेकर जिसने उसे घर से निकला था अब उसके भाइयो ने उसे वाही रोक लिया और छोटी बहन को बुलाया जो उनके भाइयो के पास थी उसे बुलाया यह देख बड़ी भाभी के होस उड़ गए उस लड़की से पूछा  क्या इसी भाभी ने तुमको घर से निकाला था उस लड़की का जवाब हा में था भीर क्या था बड़े भाई ने अपनी तलवार निकाल कर उसी वक्त अपनी पत्नी का सर कलम कर दिया और सभी भाभियों को चेतावनी दी अगर किसी ने आज के बाद बहन को किसी तरह का कष्ट दिया तो उसका अंजाम यही होगा फिर किसी ने उसे कभी परेसान नहीं किया और सभी लोग हसी खुशी से रहने लगे 
इस लेख में कोई  गलती हो तो हमें अवगत कराये अपनी राय हमें दे 

Monday, 27 June 2011

बहादुर लड़की



बात उन दिनों की है जब मै इंटर की परीछा दे रहा था मै उन दिनों परीछा केंद्र से परीछा देकर ऑटो से वापस आ रहा था और मै ड्राईबर की बगल वाली सिट पर बैठा था अचानक एक लड़की ऑटो में आकर पीछे वाली सिट में बैड गई और उसके साथ ही जल्दवादी में एक लड़का ऑटो में चढ़ता   हुआ दिखाई दिया और वोह लड़की के बगल में बैठ गया हम कुछ ही दूर पहुचे थे की पीछे से जोरदार की एक तमाचे  की आवाज आई अचानक ऑटो में बैठे सभी लोग दंग रह गए लड़की बहुत गुस्से में थी और वोह जोर से लड़के से कह रही थी की आखिर तू पूछेगा नहीं की मैंने थप्पण क्यों मारा ? लड़के के मुह से आवाज नहीं निकल रही थी सायद वोह डर गया था वोह इसलिए सायद डर गया था की माहोल बिगड़ गया है अगर कुछ बोला तो उसकी धुनाई पक्की है लेकिन सारी सवारिया यह जानने के लिए उत्सुक  थी की आखिर  हुआ क्या  लेकिन ऑटो वाला ऑटो रोकने की बजाये चलाये जा रहा था ? सारी सवरिया अनजान बनकर पूछने लगी क्या हुआ ? मैंने सोचा की लड़की हिचकिचाएगी  और आज के इस लफंगे को सबक मिलने से रह जायेगा  पर वोह बहुत साहसी लड़की निकली , उसने ऑटो वाले से कहा अगर वोह उस लड़के को ऑटो से नहीं उतारेगी तो वोह खुद उतर कर दूसरा ऑटो ले लेगी  ! फिर उस लड़की ने सवारियो को बताया की वोह लड़का काफी दिनों से रोज ऑटो में आकर बैठ जाता था लकिन आज उसने गलत हरकत की तो मैंने भी सबक सिखाने  में देर नहीं की उसने कहा अगर मै ऐसा नहीं करती तो यह मुछे कमजोर और मजबूर समछ कर मुछे परेसान करता और इसकी हरकते बड़ जाती इस लिए मैंने ऐसा किया ! फिर क्या था सारी सवारिया एक साथ बोल उठी इसे तुरंत आटो से उतारते हो की हम सभी उतर जाये ? फिर क्या था ऑटो वाले को रोक कर उस लड़के को उतरना पड़ा  ? मै सारे रास्ते यही सोचता रहा की सभी लडकिया ऐसे ही साहस का परिचय दे तो सायद इस  छेड़ खानी  पर अपने आप ही विराम लग जाये?

Sunday, 26 June 2011

महाराज की न्यायशीलता



यह कहानी बुंदेलखंड में ओरछा नामक स्थान में एक न्यायप्रिय राजा ओरछा नरेश वीर जू देव जी की है वोह एक बीर योद्धा होने के साथ - २ न्याय प्रिय भी थे एक दिन उनका पुत्र शिकार  के लिए जंगल में गया सारा दिन जंगल में घुमने के बाद जब उसे कोई शिकार नहीं मिला अचानक उसकी नजर एक हिरन पर पड़ी राजकुमार अपने घोड़े  से हिरन का पीछा करने लगा लेकिन राजकुमार का संतुलन बिगड़ जाने से घोड़े की गति धीमी हो जाती है और हिरन नजरो से ओझल हो जाता है राजकुमार को कुछ दूर पर एक महात्मा दिखे राजकुमार महात्मा के पास जाकर पूछता है की "महात्मन " अपने किसी हिरन को जाते इधर से देखा है महात्मा ने कोई जवाब नहीं दिया ? राजकुमार आगे बढ जाते है लकिन उन्हें हिरन नहीं मिलता है जिससे राजकुमार क्रोधित होकर महात्मा के पास आता है और उन पर अपने कुत्तो को छोड़ देता है जिससे महात्मा की मृत्यु हो जाती है ?  यह बात साडी प्रजा में "जंगल में आग के सामान " फ़ैल जाती है अब महाराज दुबिधा में पड़ जाते है  की वोह अपने पुत्र  को सजा कैसे दे ? अब प्रजा भी सोच में पड़ जाती है की महाराज के न्यायशीलता की यह परीछा होगी महाराज कार्यवाही का आदेश दे देते है राजकुमार को अपराधी घोषित किया जाता है लेकिन कुछ दरबारी गढ राजा से उसे माफ करने का निवेदन करते है तब महाराज सिँहासन से उठ कर कहते है कि राजकुमार ने आवेश मे आकर यह गुनाह किया है इसलिए यह गुनाह माफ करने योग्य नही है आखिर वह राज्य ही कैसा होगा जहा महात्माओ को इस प्रकार मारा जाए इसलिए मै मानवता कि सुरझा के लिए राजकुमार को म्रत्यु दंड देता हुँ राजा कि इस न्यायशीलता को देख राजा के आगे समस्त प्रजा का सिर झुक गया

Friday, 24 June 2011

अन्धो की गणना

एक बार की बात है अकबर और बीरबल दरवार में थे तभी अकबर ने बीरबल से पूछा की हमारे देश में कितने अंधे लोग है मुछे अपने देश में अन्धो की जनसँख्या कितनी है यह तुम मुछे पता करके बताओ बीरबल ने कहा ठीक है महाराज मै आपको एक महीने के अन्दर गणना करके बता दुगा अकबर ने कहा ठीक है अब बीरबल वहा से चल दिया और दुसरे दिन से गणना करने में लग गए उन्होंने गणना करने का जो तरीका अपनाया वोह महाराज के समछ में नहीं आया उनका तरीका जो था वोह एक जगह पर बैठ कर गणना करने का था बीरबल ने एक रजिस्टर लिया और वोह बाजार में जाकर मोची का काम करने लगे उनको जो भी देखता वोह यही पूछता क्या कर रहे जो भी बीरबल से पूछता क्या कर रहे हो उसका नाम रजिस्टर में लिख लेते बीरबल अब एक महिना होने को था तभी महीने के आखिरी दिन महाराज वहा से गुजर रहे थे बीरबल को मोची का काम करते    देख  बीरबल से  पूछा  क्या कर रहे हो बीरबल बीरबल ने उनका भी नाम लिख लिया रजिस्टर में और महाराज के जवाब का कुछ उत्तर नहीं दिया अब बीरबल दरबार में पेस हुए अकबर ने पूछा अन्धो की जनगणना कर ली बीरबल ने कहा जी महाराज अकबर ने पूछा अन्धो की संख्या कितनी है बीरबल ने सर चहकते हुए कहा महाराज यहाँ सभी अंधे है महाराज ने पूछा वोह कैसे  बीरबल ने कहा देखिये  महाराज  मै बाजार में मोची का काम कर रहा  था मैंने  जिसको  भी देखा  उसने  मुछसे  यही पूछा की क्या कर रहे हो अगर  अंधे न  होते  तो  वोह मुछसे यह  प्रस्न  ही न करते महाराज ने बीरबल से कहा तुम्हारा भी    जवाब नहीं कैसे - २ काम करते हो  अब महाराज और बीरबल दोनों  हसने  लगे और अपने -२ रस्ते  चल दिए 

खुल रही सरकार की पोल

मै एक छात्र हु और मैंने इसी साल १२ वि पास किया है मै न तो कोई प्रोफेसनल राईटर हु और न कोई लेखक मै तो जो मेरा दिल कहता है वाही करता करता हु मै अपने दिल की बात शब्दों  के माद्यम से यहाँ उसको लिख रहा हु जो गलतिया समछ में आये मुछे अवगत कराये
                    "सरकार की पोल से मेरा मतलब "
 सरकार के वादे सारे छुड़े नजर  आते साफ़ -२ दिख रहे है  सरकार का लगता है सिद्धात ही बना लिया है की अनाज को खरीद कर उसको एक कुढ़े की ढेर की तरह फेक देना और उस आनाज को भूखे लोगो नहीं देना है चाहे वोह साद जाये या गल जाये अभी तजा हालिया रिपोर्ट देखि जाये तो भारत की ६.५ करोड़ जनसँख्या भूखो मर रही है सरकार को इससे क्या सरकार के गोदामों में अनाज सड़ जायेगा लकिन गरीबो क नहीं बाटा जायेगा ऐसी कसम खा रखी है सरकार ने क्योकि उनके बच्चो और उन्हों ने भूख से तडपना क्या होता है वोह महसूस नहीं किया है न इस लिए  कैसे समछे गे इस समय की अगर हकीकत में देखे तो ६.५ करोड़ नहीं इससे कही ज्यादा है लकिन कागज कलम का खेल है जिनके पास खाने को नहीं उनका apl  कार्ड  तक नहीं बनता और जिन्होंने कभी गरीबी देखि ही नहीं है उनके पास bpl  कार्ड है जिनको राशन मिलना चाहिए उनको आनाज के दर्सन नहीं होते है जिनके घरो में आनाज सड़ रहा है उनको रसन कार्ड में नाम और हर महीने रासन दिया जाता है हकीकत तो यह है की सरकार  गरीबो के  जो भी खेल - २ रही है इससे आने वाला हमारा भविष्य तो साफ़ - २ दिखाई दे रहा है की वोह ब्राईट नहीं बल्कि ब्लैक है उसके लिए हम सभी को दोसी भी नहीं ठहरा  सकते है क्योकि मैंने कही पढ़ा था 
           "शैले - २ न मानिक्यम , मौतिकम न गजे - २ !
                              साधवो न सर्वत्र , चन्दनं न बने -२,,
इस लिए सभी को गलत साबित नहीं कर सकते लकिन अगर किसी फल के बिच में सदा फल रख देने से वोह सरे फल साडा देता है उसी प्रकार एक गन्दा व्यक्ति पुरे सरकार की छवि ख़राब करता है उसी सड़े फल को सरकार को निकलने की जरुरत है 


Thursday, 23 June 2011

होसलो



सपने उन्ही के सच होते है
जिनके सपनो में जान होती  है 
पछियो के पारो में नहीं 
होसलो में उड़ान होती